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रोडवेज का भी अजब हाल, सैलरी देने के बजाए न्यूनतम वेतनमान से कर दी तनख्वा,हाईकोर्ट ने मांगा पूरा तथ्य



नैनीताल- राज्य में रोड़वेज कर्मचारियों की सैलरी व यूपी उत्तराखण्ड की परिसम्पत्तियों के बंटवारे मामले पर हाईकोर्ट ने केन्द्र सरकार को आदेश जारी किया है। हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस कोर्ट ने केन्द्र सरकार को कहा है कि 15 सितंबर तक दोनों राज्यों के मुख्य सचिवों की बैठक करें और उस बैठक में लिये निर्णय को हाईकोर्ट में पेश करें। हांलाकि सुनवाई के दौरान कोर्ट में पेश हुए अधिकारियों ने कहा कि जुलाई तक की सैलरी के लिये 16.5 करोड़ की धनराशि जारी कर दी गई है। हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान कर्मचारियों की ओर से कोर्ट में बताया गया कि सरकार ने उनकी सैलरी में कटौती कर दी है जो न्यूनतम वेतनमान से भी कम है चीफ जस्टिस कोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील को आदेश दिया है कि वो सभी तथ्य कोर्ट के सामने अगली तारिख यानि 16 सितंबर को उनके सामने पेश करें। आपको बतादें की रोडवेज कर्मचारी यूनियन ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर सैलरी देने की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि अगर वो सैलरी के।लिए हड़ताल पर जाते हैं तो सरकार उनपर एस्मा के तहत कार्रवाई करती है। रोडववज कर्मचारी यूनियन ने याचिका में कहा है कि यूपी सरकार से 700 करोड़ परिसम्पत्तियों के बंटवारे का मिलना है और सरकार ने 45 लाख केदारनाथ आपदा समेत अन्य की देनदारी सरकार पर है।

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