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उत्तराखंड हाई कोर्ट ने कहा ये तो जीवन जीने के मौलिक अधिकार और शिक्षा के अधिकार का भी हो रहा है हनन..


तीन हफ्ते में मांगा कोर्ट ने जवाब

नैनीताल - हैड़ाखान के उड़वा और पस्तोला गावँ के बच्चों द्वारा नदी पार कर स्कूल जाने पर उत्तराखंड हाई कोर्ट ने संज्ञान लिया है। चीफ जस्टिस कोर्ट ने सरकार डीएम नैनीताल को नोटिस जारी कर तीन हफ्तों में जवाब मांगा है। कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी की है कि ये ना सिर्फ जीवन जीने के मौलिक अधिकार का हनन है बल्कि शिक्षा के अधिकार का भी हनन है जिसमें बच्चे पानी मे भीगने और स्कूल जाने में असमर्थ होने पर स्कूल छोड़ देते हैं। दरअसल हल्द्वानी के गगनदीप ने जनयाचिका दाखिल कर कहा है कि हैड़ाखान के इन दो गावँ में आनेजाने की दिक्कतें आजादी के बाद भी चली आ रही हैं। उड़वा और पस्तोला गावँ में सडक व नदी में पुल नहीं होने से राशन और मेडिकल की सुविधा भी नहीं बन पाती है बरसात में पूरी तरह संपर्क कट जाता है। याचिका में कहा गया है कि बच्चों को 8वीं के बाद पढ़ने बाहर जाना पड़ता है लेकिन नदी में पुल नहीं होने के चलते पानी में तैरकर जाते हैं जिसके लिए 2 जोड़ी कपड़े लेकर जाना पड़ता है,,याचिका में कहा गया है कि सरकार ने पिछले सालों में 48 लाख में पुल सड़क के निर्माण का प्रस्ताव पास किया सर्वे भी किया लेकिन सरकार द्वारा अब तक भी कोई कार्रवाई नहीं कि गयी है। याचिका में कहा गया है कि अगर नदी में पानी बढ़ता है तो उनका 6 किलोमीटर का शहर का रास्ता 80 किलोमीटर हो जाता है। याचिका में नदीं में पुल निर्माण की मांग की गई है।

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