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बीजेपी नेता ने लिखा पत्र ये इन अधिकारियों की वजह से हारे चुनाव तो चुनाव आयोग होगा जिम्मेदार..

सरकार ने छूट्टी के दिन किया तबादला तो हाईकोर्ट ने लगा दी रोक..


नैनीताल – बीजेपी के नेताओं को अपनी ही सरकार के अधिकारियों और कर्मचारियों पर भरोषा नहीं है। ये हम इस लिये कह रहे हैं हाईकोर्ट में कुछ ऐसा ही मामला पहुंचा…बीजेपी नेता को कुछ कर्मचारियों से हार का ड़र दिखा तो सरकार ने छुट्टी के दिन तबादले कर दिये लेकिन अब हाईकोर्ट ने इस पर रोक लगा दी है।


बीजेपी नेता मुकेश राणा ने अपने पत्र में लिखा..


हमारी पार्टी चुनाव हारती है तो इसकी पूर्ण जिम्मेदारी चुनाव आयोग की होगी..कुछ ऐसा ही पत्र बीजेपी प्रांतिय परिषद के सदस्य मुकेश राणा ने चुनाव आयोग को लिखा है। उघमसिंह नगर के सहकारी विभाग में अपर्णा वल्दिया.लीला बोरा,विकास शर्मा गौरव शर्मा के ट्रांसफर करने की मांग को लेकर 29 नवम्बर को पत्र लिखा जिसके बाद बीजेपी नेता के इस शिकायती पत्र पर सहायक चुनाव अधिकारी के निर्देश दे दिये लेकिन तबादला ऐसे दिन हुआ जब सरकारी छुट्टी थी यानि 25 दिसंबर को… हांलाकि इस तबादला आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती मिली तो कोर्ट ने ट्रासफर पर ही रोक लगा दी और इसे राजनैतिक शिकायत बता दिया..कोर्ट ने माना की ये राजनैतिक शिकायत है बिना किसी शपथ पत्र के साथ शिकायत दी गई है। दरअसल मुकेश राणा बीजेपी के प्रांतीय परिषद के सदस्य हैं..बीना किसी शपथ पत्र के दर्ज की गई शिकायत से तीन साल से गृह जनपद में जमे कर्मचारियों की शिकायत की तो विभाग ने भी हटाने में देरी नहीं की..हाईकोर्ट के वकील कमलेश तिवाड़ी ने कहा कि जब मामले पर गहनता से देखा गया तो पता चला की कुछ लोगों की नियुक्ति शिकायत कर्ता ही सहकारी विभाग में करने की तैयारी कर रहा था और नाकाम होने पर तबादले के लिये पत्र लिख दिया। वकील कमलेश तिवाड़ी ने कहा कि जब किसी की शिकायत आती है उसके लिये नियम है कि 18 चार उत्तराखण्ड ट्रासफर एक्ट 2017 का पालन नहीं किया गया क्योकिं इसमें पहले विभाग को जांच करनी थी और शपत पत्र भी शिकायत पत्र लेना था….जिसको कोर्ट ने माना और तबादला पर रोक लगा दी है वकील कमलेश तिवाड़ी ने कहा कि ये शिकायत सिर्फ राजनैतिक थी क्योकि मुकेश राणा अपने लोगों को सहकारिता में भर्ती कराना चाहता था जिसकी जांच भी हुई और इन चार लोगों की जांच कमेटी ने उन भर्ती को गलत बताया था…जिसके चलते इन्हौने ये शिकायत की थी।


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