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आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय के फैसले पर हाईकोर्ट की रोक...मांगा जवाब..


नैनीताल:: हाईकोर्ट ने आयुर्वेद विश्वविघालय में असिस्टेंट प्रोफेसरों की नियुक्ति मामले में अभ्यर्थियों को बड़ी राहत दी है। हाईकोर्ट ने पूरे मामले की सुनवाई के बाद विश्वविघालय द्वारा नियुक्ति की विज्ञप्ति को निरस्त करने पर विश्वविघालय के फैसले पर रोक लगा दी है कोर्ट ने सचिव आयुष वीसी व रजिस्ट्रार आयुर्वेद विश्वविघालय को 4 हफ्तों के भीतर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। दरअसल दीपक कुमार सेमवाल ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा है कि उत्तराखण्ड आयुर्वेद विश्वविघालय हर्रावाला देहरादून में प्रोफेसर.असिस्टेंट प्रोफेसर,स्टाफ,नर्सिंग स्टाफ के के लिये 27 जुलाई 2017 को विज्ञप्ति जारी की थी जिसमें विश्वविघालय द्वारा 90 प्रतिशत पदों पर भर्ती भी की गई। 2019 में सरकार ने आर्थिक रुप से पिछले लोगों के लिये आरक्षण देने का प्रावधान का एक्ट लाई तो विश्वविघालय ने आरक्षण की गणना नहीं होने का हवाला देते हुए विज्ञप्ति को निरस्त कर दिया। विश्वविघालय के इस निर्णय को चुनौती देते हुए कहा गया कि यह एक्ट उन पर लागू नहीं होता क्योकि सरकार इस एक्ट को 2019 में लेकर आई और विज्ञप्ति 2017 में आई है और विश्वविघालय में 90 प्रतिशत पदों पर नियुक्तियां कर दी गई है उन पर यह एक्ट कैसे लागू हो सकता है। याचिका में निरस्त की गई विज्ञप्ति पर रोक लगाने के साथ नियुक्तियां जारी करने की मांग कोर्ट से की गई है।

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