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कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में अवैध निर्माण पर हाई कोर्ट तल्ख़...


मुख्य सचिव / प्रमुख सचिव पर्यावरण को दिए दिशा निर्देश


नैनीताल :: देहरादून निवासी अनु पंत एवं अपने द्वारा स्वतः संज्ञान ले कर योजित की गयी दो जनहित याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए माननीय उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व में मोरघटि, पाखरो क्षेत्र में हुए अवैध निर्माण पर तल्ख टिपणियां करते हुए, मुख्य सचिव उत्तराखंड सरकार एवं प्रमुख सचिव वन एवं प्रमुख सचिव पर्यावरण से तत्काल दोषियों के खिलाफ कार्यवाही करने के दिशा निर्देश पारित किये है।


बृहस्पतिवार को देहरादून निवासी अनु पंत के द्वारा जो जनहित याचिका की गयी थी, उस पर विस्तृत सुनवाई हुई, अनु पंत द्वारा बताया गया की, जिस अधिकारी को उत्तर प्रदेश शासन द्वारा 1999 में विजिलेंस रिपोर्ट में दोषी पाया गया था, जिस पर जंगली जानवरों की खाल की खरीद फरोख्त जैसे गंभीर अपराधों की पुष्टि हुई थी, और यह स्पष्ट निर्णय लिया गया था की ऐसे अधिकारी को किसी संवेदन शील जगह तैनाती नहीं दी जाएगी, उसी वन प्रभागीय अधिकारी किशन चाँद को कालागढ़, कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व जैसे अति संवेदन शील स्थान में तैनाती दी गयी।

इस के उपरांत जब कॉर्बेट में अवैध निर्माण की गतिविधियां शुरू हुई और राष्ट्रीय टाइगर संरक्षण प्राधिकरण द्वारा जाँच रिपोर्ट दायर की गयी, उस में भी वन प्रभागीय अधिकारी किशन चाँद को इस पूरे अवैध निर्माण के लिए दोषी पाया गया। इस के बाद, हाई कोर्ट के दिशा निर्देश में उच्च स्तरीय समिति गठित हुई। उस उच्च स्तरीय समिति में वन विभाग के विभागाध्यक्ष राजीव भर्तरि की अध्यक्षता में , एक और रिपोर्ट द्वारा भी श्री किशन चाँद को ही इस सभी गरबड़ी के पीछे दोषी पाया गया, और तत्कालीन मुख्य वन परिपालक, जबेर सिंह सुगह द्वारा, किशन चाँद पर कोई कार्यवाही नहीं की गयी इसका भी उल्लेख किया गया।

गौरतलब है की बीच जाँच के दौरान ही वन मंत्री द्वारा श्री किशन चाँद की तारीफ की गयी थी और हाई कोर्ट में रिपोर्ट दायर होने के बाद तत्कालीन प्रमुख वन संरक्षक, राजीव भर्तरि को शासन द्वारा पद से हटा दिया गया था।

गौरतलब है की शासन ने 25 नवम्बर को किशन चाँद को भी स्थानांतरण के आदेश पारित किये थे, परन्तु उन आदेशों का कभी क्रियान्वयन नहीं किया गया और किशन चाँद आज तिथि तक दुसरे अधिकारी को चार्ज नहीं सौंप रहे हैं।


इस पूरे प्रकरण को बहुत गंभीरता से लेते हुए माननीय उच्च न्यायालय ने पूछा की जाँच के दौरान, वरिष्ठ अधिकारियों का इस तरीके से स्थानांतरण किस आधार पर किया गया। इस के अतिरिक्त माननीय उच्च न्यायालयने अपना विस्तृत आदेश पारित किया, जिसमें प्रमुख सचिव पर्यावरण एवं मुख्य सचिव प्रशासन को यह दिशा निर्देश दिए गए है कि वह दोषी पाये गए अधिकारी के खिलाफ दंडात्मक कार्यवाही करे और चार्ज हैंडओवर सुनिश्चित करें । मामले की अगली तिथि शीतकालीन अवकाश के समाप्त होते ही प्रथम दिन, 14 फ़रवरी २०२२ को नियत की गयी है।


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