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कोरोना ने रोका बलियानाले का ट्रीटमेंट..नहीं लौटे जापानी इंजीनियर..तो अब ये है प्लान


नैनीताल - नैनीताल के अस्तित्व के लिये सबसे बड़ा खतरा यहां बलियानाले से कटाव का है..पिछले कई सालों से नासूर बने भूकटाव ने चिंता शहर की बड़ा दी है तो कोरोना ने ट्रीटमेंट के काम पर भी ब्रेक लगा दिया है।


रोजाना हो रहा है कटाव...


नैनीताल में बलियानाले के इस कटाव ने लोगों को दहशत में डाल दिया है। पिछले एक हफ्ते के दौरान पानी से हो रहे कटाव के साथ भूस्खलन ने चिंता बड़ा दी है तो स्कूल के पास और घरों की तरफ बड़ रही दरारों ने खतरा बड़ा दिया है। हांलाकि कोरोना के चलते पहाड़ी से हो रहे भूकटाव का ट्रीटमेंट का काम एक इंच भी नहीं हो सका है। जमीन के धंसाव से बन रहे खतरे पर स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं। स्थानीय समाजसेवी व जानकार गिरीश जोशी कहते हैं कि पिछले 20 सालों से लगातार कटाव और भूस्ख्लन जारी है जब तक ट्रीटमेंट आलूखेत हिल और बलियानाले हिल में नहीं होगा तो ऐसे ही कटाव होता रहेगा जिससे हरिनगर तल्लीताल बाजार के साथ नैनीझील को भी बड़ा खतरा भविष्य के लिये है।


हाईकोर्ट की कमेटी के बाद शुरु हुआ ट्रीटमेंट..कोरोना ने रोका काम...


दरअसल बलियानाले का जख्म नैनीताल के लिये पूराना है और राज्य बनने के बाद इसका ट्रिटमेंट भी हुआ है। तेजी से कटाव ने पूराने काम पानी के साथ बहा दिये तो 2017 के बाद भूस्खलन में तेजी भी आई है। हांलाकि हाईकोर्ट के आदेश के बाद सरकार ने हाई पावर कमेटी का गठन किया और 60 परिवारों का विस्थापन भी किया गया। साल 2019 के बाद तैयार डीपीआर पर काम शुरु होने की उम्मीद जगी लेकिन कोरोना के चलते जापान के इंजिनियर लौट कर ही नहीं आ सके। नैनीताल डीएम धीराज गर्ब्याल ने कहा कि कोरोना के चलते ट्रीटमेंट का काम जायका से नहीं हो पाया है और दो सालों से इंजिनियर नहीं पहुंचे हैं अब इस प्रोजेक्ट का पैंसा भी 2 सालों में बड़ा है। डीएम ने कहा है कि हाई पावर कमेटी ने लाँग टर्म काम के लिये सिचाई विभाग के साथ अन्य एजंसियों को काम के लिये काम के लिये कार्ययोजना तैयार की जा रही है अगर ऐसा हुआ तो जल्द ट्रीटमेंट का काम शुरु किया जा सकेगा।


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