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सेब रोकेगा पहाड़ से पलायन...यहां की पहाड़ियां हैं विदेशी सेब के लिए बेहतर...

Updated: Sep 8


मुनीब रहमान : नैनीताल- पहाड़ में पलायन बड़ी समस्या है..लेकिन अब सेब की खेती से पलायन रोकने और किसानों की तकदीर बदलने पर काम किया जा रहा है। मिशन एप्पल के जरिये लक्ष्य है कि सिर्फ 5 सालों में उत्तराखण्ड सेब के आयात को रोकने की प्लानिंग पर काम किया जा रहा है।


विदेशी सेबों की खेती से जुड़ रहे हैं किसान..



दरअसल पहाड़ में किसान उन्नति सेब की खेती से जुड़ रहा है..जेरोमइन,किंग रोट प्रजाति के विदेशी सेब की खेती उत्तराखण्ड में लहलहाने से सेब कास्तकार लाखों का मुनाफा ले रहे हैं। चटक लाल रंग की दमक से सेब कारोबारी इस कदर प्रभावित हैं कि नैनीताल जिले में 65 बगान महज तीन सालों में ही फल देने लगे हैं। पिछले कई सालों से राज्य के उत्तरकाशी पिथौरागढ अल्मोंड़ा नैनीताल में 500 बगानों के जरिये किसानों को इस खेती से जोड़ा गया है तो किसानों की झोली भी आय दोगुना होने से भर रही है। नैनीताल के धानाचुली के किसान विनोद गर्ग कहते हैं कि तीन साल पहले 4 नाली में 2 से 3 सौ पेड़ों का रोपण किया था आज वो फल देने लगे हैं और सालाना 2 से 3 लाख की आय होने भी लगी है किसान विनोद गर्ग कहते हैं कि अब वो इस खेती को और बढाने का मन बना रहे हैं और आस पास के लोगों को भी इस सेब की खेती से जुड़ने को कह रहे हैं।


कम चिलिंग वाले क्षेत्रों में लग रहे हैं बागान...


दरअसल इस तहर की सेब की खेती में 1 नाली में एक लाख का खर्चा किसान पर आता है,जिसमें पोल नेट,ड्रिप पाइप पंप लगाना होता है। खास बात ये है कि 1200 मीटर से 22 सौ मीटर तक पैदा होने वाले इन सेब बगानों से दूसरे साल से ही पेड़ फल देना शुरु कर देता है तो 35 ड्रिग्री तापमान में भी सेब पैदा हो जाता है। रिसर्च बताती है कि हिमांचल 9 से 10 लाख टन सेब उत्पादन में 10 हजार करोड़ की इकाँनोमी सेब उत्पादन से कमा रहा है तो कश्मीर में 11 लाख टन उत्पादन है..वहीं उत्तराखण्ड में 50 हजार से 1 लाख टन ही उत्पादन सेब का हो रहा है। पिछले 12 सालों से उन्नति सेब पर काम कर रहे इंडो ड़च के निदेशक सुधीर चड्डा कहते हैं कि उत्तराखण्ड में बहुत जमीन है जो 12 सौ से 15 सौ की रेंज में है इस स्पेश को सेब उत्पादन से भरना है अगर हम 5 सालों में 10 हजार हैक्टेयर में सेब का उत्पादन करें तो विदेशों से जो हर साल साढे तीन लाख टन आयात सेब होता है उसको रोका जा सकता है। सुधीर चड्डा कहते हैं कि अब निजी कम्पनियां सेब उत्पादन के लिये किसानों को पैंसा भी दे रहे हैं ताकि बागान लगें और सेब को कम्पनियां जूस समेत अन्य काम में सेब ले सकें। चड्डा ने कहा कि 5 सालों में अब हिमांचन के बराबरी करने का लक्ष्य है अगर सरकार किसानों को थोड़ा सब्सिड़ी दे तो उत्तराखण्ड ये कर सकता है।



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